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राब्ता - समझाना भी नहीं आता.. समझ भी नहीं आता..| Raabta | A Hindi Poetry Collection of Love, Emotions, Relationships, Unspoken Feelings & Life

By Deepak Chawla


GENRE

Poetry

PAGES

112

ISBN

9789360700843

PUBLISHER

StoryMirror

PAPERBACK ₹299 E-BOOK ₹149
Rs. 299
Sold By

StoryMirror

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किताब के बारे में (About the Book)

दीपक-भाई को मैं पिछले कई वर्षों से जानता हूँ—कई रूपों में, कई अंदाज़ों में और अनेक रंगों में।

एक सफल कॉर्पोरेट लीडर (Corporate Leader) के रूप में… एक संवेदनशील शायर और उपन्यासकार (Poet and Novelist) के रूप में… एक अभिनेता और वॉइस आर्टिस्ट (Actor and Voice Artist) के रूप में… लेकिन इन सबसे बढ़कर, दीपक-भाई एक बेहतरीन इंसान हैं—ऐसे दोस्त, मार्गदर्शक और हमसफ़र, जिन्होंने न जाने कितनों को अपनी सोच, संवेदनशीलता और स्नेह से समृद्ध किया है। यह मैं अपने अनुभव से कह सकता हूँ, क्योंकि कुछ वर्ष पहले मुझे उनके साथ एक ही कंपनी में काम करने का सौभाग्य मिला था।

राब्ता (Raabta) दीपक-भाई का पाँचवाँ काव्य-संग्रह (Poetry Collection) है। उनके लेखन से मैं भली-भाँति परिचित हूँ। जिस नज़ाकत और संवेदना से वे अपने जज़्बात को शब्द देते हैं, वह हर पाठक के दिल में एक अपना-सा रिश्ता बना देती है। उनकी शायरी पढ़ते हुए अक्सर लगता है, जैसे वे हमारी ही कोई अनकही दास्तान बयाँ कर रहे हों।

मैं दीपक-भाई को राब्ता के प्रकाशन पर दिल से बधाई देता हूँ और कामना करता हूँ कि उनकी क़लम यूँ ही शायरी के चाहने वालों के दिलों तक अपना राब्ता बनाए रखे।

— प्रतीक गांधी (Pratik Gandhi)

लेखक के बारे में (About the Author)

दीपक ने अपने लगभग चार दशकों के व्यावसायिक जीवन (Professional Career) में उच्चस्तरीय कॉर्पोरेट जगत और शैक्षिक संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे एक उत्कृष्ट मार्गदर्शक (Mentor), वक्ता (Speaker) और शिक्षक (Teacher) हैं।

इन सबके अलावा, वे एक प्रतिष्ठित ग़ज़लकार (Ghazal Writer) और कुछ अंग्रेज़ी बेस्टसेलर पुस्तकों (English Bestselling Books) के लेखक भी हैं। हाल ही में दीपक को OTT अभिनेता और वॉइस आर्टिस्ट (Voice Artist) के रूप में भी देखा गया है।

दीपक ने अपनी ग़ज़लों, नज़्मों और कहानियों के माध्यम से पाठकों के दिलों में अपनी अलग जगह बना ली है। वे जिस सरलता से जीवन के जटिल पहलुओं का खूबसूरत चित्रण करते हैं, वह पाठकों को विचारशीलता की ओर प्रेरित करता है और जीवन के विविध आयामों को एक नए दृष्टिकोण (New Perspective) से समझने का अवसर भी प्रदान करता है।

अपनी भावुक रचनाओं के माध्यम से दीपक इससे पहले रूबरू, सजदा, आज़माइश और दरमियाँ जैसे मनभावन काव्य-संग्रहों (Poetry Collections) के साथ-साथ अंग्रेज़ी उपन्यास Business as Usual और Between You and Me के ज़रिए पाठकों के दिलों में अपनी जगह बना चुके हैं।

और अब राब्ता (Raabta) में दीपक के अल्फ़ाज़ और अंदाज़ एक बार फिर आपके मन को अवश्य छू जाएँगे।

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Instagram: @the_deepverse

Facebook: @deepakchawla1115

LinkedIn: @deepakchawla15







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