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नवाइयत – नवा की ग़ज़लें (Navaaiyat) | 163 ग़ज़लों का हिंदी ग़ज़ल संग्रह | शायरी की किताब, शब्दार्थ सहित | Hindi Ghazal Book | नवीन जोशी 'नवा'

By नवीन जोशी (Naveen Joshi)


GENRE

Poetry

PAGES

184

ISBN

9789360700836

PUBLISHER

StoryMirror

PUBLICATION DATE

24/10/2026

E-BOOK ₹199 PAPERBACK ₹349
Rs. 199
Sold By

StoryMirror

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About the Book

क्या दो पंक्तियाँ वह कह सकती हैं, जो कई पन्ने भी नहीं कह पाते?

ग़ज़ल की सबसे बड़ी ख़ूबी यही है। नवाइयत – नवा की ग़ज़लें में नवीन जोशी 'नवा' की 163 ग़ज़लें हैं। हर ग़ज़ल अशआर से बनी है। हर शे'र अपने आप में पूरा है, और सारे शे'र मिलकर एक एहसास रचते हैं।

ये ग़ज़लें हिंदी में हैं, पर इनमें उर्दू शायरी की रवानी और लफ़्ज़ों की ख़ुशबू है। इनमें मोहब्बत, इंतज़ार, वस्ल और जुदाई की बातें हैं। घर-परिवार, रिश्तों की उलझनें, आत्म-सम्मान, संघर्ष, वक़्त और तक़दीर की बातें भी हैं। बहुत मुमकिन है कि किसी शे'र में आपको अपना ही कोई एहसास मिल जाए, जिसे आप शब्द नहीं दे पाए थे।

किताब की शुरुआत शाइर की स्वर्गीय माँ को समर्पण और एक आत्मीय प्रस्तावना से होती है। 'नवा' दरअसल उनकी माँ का प्यार भरा संबोधन था, जो आगे चलकर उनका तख़ल्लुस बना। नवाइयत नवीन जोशी का पहला ग़ज़ल संग्रह है।

इस किताब में आपको मिलेंगी:

  • 163 हिंदी ग़ज़लें, जिनके शे'र अलग-अलग भी पढ़े और सराहे जा सकते हैं
  • मोहब्बत, इंतज़ार, वस्ल और जुदाई की शायरी
  • घर, परिवार और रिश्तों की उलझनों पर अशआर
  • आत्म-सम्मान, संघर्ष, वक़्त और तक़दीर पर ख़याल
  • कई ग़ज़लों में कठिन उर्दू शब्दों के अर्थ, पन्ने के नीचे दिए हुए
  • माँ को समर्पण और शाइर की अपनी बात, और उस्ताद शाइर ओबैद आज़म आज़मी साहब की नज़र-ए-सानी

नवाइयत को आप कहीं से भी खोलकर पढ़ सकते हैं, या शुरू से आख़िर तक। यह उन पाठकों के लिए है जो शायरी, ग़ज़ल और मुशायरों से प्यार करते हैं। यह उनके लिए भी है जो आज के दौर की ऐसी हिंदी ग़ज़लें पढ़ना चाहते हैं जो अपनी-सी लगें।

About the Author

नवीन जोशी, जो 'नवा' तख़ल्लुस से शाइरी करते हैं, पेशे से कंपनी सेक्रेटरी हैं और मन से शाइर। उनकी शाइरी में सोच की गहराई, रचनात्मकता और शैली की नवीनता है। उनकी ग़ज़लें रेख़्ता और कविता कोश पर सूचीबद्ध हैं, और वे मुशायरों के पसंदीदा शाइर हैं। वे इंशाद फाउंडेशन के प्रवर्तक हैं, जो उभरते हुए युवा शाइर और शाइरात को मंच देती है। नवाइयत उनका पहला ग़ज़ल संग्रह है।












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