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प्रेम - योग (Prem - Yog)

★★★★★

AUTHOR :
प्रसाद षड़ांगुले 'बेताब' (Prasad Shadangule 'Betab')
PUBLISHER :
StoryMirror Infotech Pvt. Ltd.
ISBN :
978-93-91116-77-4
PAGES :
106
PAPERBACK
₹175



About Book: 

ग़ज़ल की किताब के संक्षिप्त परिचय की बात पर यूँ लगा कि, शिद्दत से महसूस किए हुए ख़यालों और जज़्बातों से ख़ुद एक ग़ज़ल बन पाती है, फिर ग़ज़लों के संग्रह को चंद शब्दों में कैसे कहा जा सकता है। यह मुख्य रूप से प्रेम और विरह के विषय पर कही गई रवायती ग़ज़लों का संग्रह है। इसी के साथ साथ कुछ शेर और कुछ दोहे भी इसमें समाहित किए गए है। ग़ज़लों की भाषा हिंदी और उर्दू मिश्रित है, या फिर यूँ कहें..


न उर्दू में कहा मैंने न ही ये हिंदवी में है।

उतर आयी मेरे दिल में ज़बाँ जो बस उसी में है।


कई एहसास और तज्रबात जो महसूस किए, कुछ अपने, कुछ औरों के और ऐसे भी जो कहाँ से आए इसका भी कुछ पता नहीं है, सब ग़ज़लों में ढलते चले गए। लिखते समय एहसास ख़ुद उन गहराइयों में ले जाता है जब वो बोध बन जाता है, शब्द अपने अर्थ से कहीं आगे निकल कर एक तरन्नुम बन जाते है और नि:शब्द हो जाते है। आशा है कि वाचक भी प्रेम के एहसासों से तरन्नुम का यह सफ़र महसूस करेंगे।



About the Author:

प्रसाद षड़ांगुले 'बेताब' का जन्म ४ अगस्त के दिन मध्यप्रदेश, भोपाल में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। प्रसाद ने अपनी संपूर्ण शिक्षा भोपाल में ही ग्रहण की और मौलाना आज़ाद प्रौद्योगिकी महाविद्यालय से विद्युत अभियांत्रिकी में स्नातक तथा स्नातकोत्तर उपाधी प्राप्त की। शिक्षण के पश्चात वे पिछले दो दशकों से अधिक समय से सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित निजी संस्था में सेवारत है।

 

बचपन से ही प्रसाद का रुझान दर्शन और अध्यात्म की ओर रहा, जिसके चलते काव्य में रुची तथा मानवीय संवेदनाओं और प्रेम की अनुभूति का अवलोकन जीवन प्रवाह का एक स्वाभाविक हिस्सा रहा।





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