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लोकतंत्र का आईना | Loktantra Ka Aaina | चेहरा कुछ और, चरित्र कुछ और | सत्ता, सियासत और व्यवस्था का कड़वा सच

By दयाशंकर आर. पाण्डेय I Dayashankar R. Pandey


GENRE

Non Fiction

PAGES

108

ISBN

9789360701161

PUBLISHER

StoryMirror

E-BOOK ₹125 PAPERBACK ₹200
Rs. 125
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About the Book

लोकतंत्र का आईना लोकतंत्र, सत्ता, राजनीति और शासन-व्यवस्था से जुड़े सवालों पर विचार करने वाली पुस्तक है। यह पाठक को लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भूमिका, राजनीतिक जवाबदेही, चुनाव, सत्ता और नागरिकों की आवाज़ जैसे विषयों पर सोचने के लिए प्रेरित करती है।

क्या लोकतंत्र केवल चुनाव और मतदान तक सीमित है? क्या जनता की आवाज़ चुनाव के बाद भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहती है? सत्ता, राजनीतिक स्वार्थ और व्यवस्था के बीच आम नागरिक की भूमिका क्या होनी चाहिए?

पुस्तक इन सवालों को एक आलोचनात्मक दृष्टिकोण से सामने रखती है और लोकतंत्र को केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि सवाल पूछने, जवाबदेही मांगने और नागरिक भागीदारी की प्रक्रिया के रूप में देखने का अवसर देती है।

What is Inside the Book?

  • लोकतंत्र और जनता की भूमिका
  • चुनाव, सत्ता और राजनीतिक व्यवस्था
  • जवाबदेही और नागरिक अधिकार
  • राजनीति और जनहित के बीच संबंध
  • लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर विचार
  • सत्ता और व्यवस्था से जुड़े समकालीन सवाल
  • आम नागरिक के दृष्टिकोण से लोकतंत्र की पड़ताल

लोकतंत्र का आईना उन पाठकों के लिए है जो भारतीय लोकतंत्र, राजनीति, शासन-व्यवस्था और नागरिक भागीदारी से जुड़े प्रश्नों को समझना और उन पर विचार करना चाहते हैं।


About the Author

द्रयांशकर आर. पाण्डेय ने लोकतंत्र का आईना के माध्यम से लोकतंत्र, सत्ता, सियासत और व्यवस्था से जुड़े विभिन्न प्रश्नों को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी लेखनी का उद्देश्य पाठकों को लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिक भूमिका से जुड़े विषयों पर विचार करने के लिए प्रेरित करना है।







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